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ग्लिक्लाज़ाइड (Gliclazide): उपयोग, कैसे काम करता है, दवाएँ

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ग्लिक्लाज़ाइड वयस्कों में टाइप 2 डायबिटीज़ के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा है। यह पैंक्रियास (अग्न्याशय) को ज़्यादा इंसुलिन छोड़ने में मदद करती है, जिससे ब्लड शुगर (खून में शक्कर) कम होती है। भारत में यह सिर्फ़ डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवा है और डॉक्टर के बताए खान-पान और गतिविधि की योजना के साथ इस्तेमाल होती है।

फ़ार्मासिस्ट समीक्षा जारी है। यह पेज नीचे दिए गए स्रोतों पर आधारित है और हमारे पंजीकृत फ़ार्मासिस्ट इसकी जाँच कर रहे हैं।

अंतिम अपडेट: · गलती बताएँ

ग्लिक्लाज़ाइड: एक नज़र में. किसलिए इस्तेमाल होती है: वयस्कों में टाइप 2 डायबिटीज़. पहले डॉक्टर से पूछें: गुर्दे या जिगर की गंभीर बीमारी, खाना छोड़ना या शराब पीना, डायबिटीज़ की दूसरी दवाएं या इंसुलिन, एंटीबायोटिक या फफूंद-रोधी दवाएं, गर्भावस्था या स्तनपान. इनके लिए तुरंत चिकित्सा सहायता लें: ब्लड शुगर बहुत कम होना: उलझन, दौरे या बेहोशी, चेहरे, होंठ या गले में सूजन, त्वचा (चमड़ी) या आंखों का पीला पड़ना. ज़्यादा मात्रा में लेना: अगर कोई बताई गई मात्रा से बहुत ज़्यादा दवा खा ले, तो ठीक महसूस करने पर भी 112 पर कॉल करें या नज़दीकी अस्पताल जाएं. खुराक: लेबल या अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार लें.

ग्लिक्लाज़ाइड कैसे काम करती है?

ग्लिक्लाज़ाइड पैंक्रियास की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं से ज़्यादा इंसुलिन छुड़वाती है, और ज़्यादा इंसुलिन शरीर को खून से शक्कर बाहर निकालने में मदद करता है। मॉडिफाइड-रिलीज़ गोलियां (टैबलेट) दवा को दिन भर धीरे-धीरे छोड़ती हैं।

ग्लिक्लाज़ाइड कैसे लें

लेबल पर लिखा या अपने डॉक्टर का बताया तरीका मानें। ग्लिक्लाज़ाइड आमतौर पर दिन में एक या दो बार खाने के साथ ली जाती है। खुराक डॉक्टर तय करते हैं और कई हफ्तों में बदली जा सकती है। खाना न छोड़ें, और डॉक्टर से बात किए बिना दवा बंद न करें।

ग्लिक्लाज़ाइड के साइड इफेक्ट्स

ज़्यादातर लोग यह दवा बिना किसी गंभीर परेशानी के लेते हैं। कुछ असर हल्के होते हैं, लेकिन कुछ में डॉक्टरी मदद की ज़रूरत होती है।

कम होने वाले या हल्के

  • ब्लड शुगर कम होना: चक्कर आना, कांपना, पसीना आना, बहुत तेज़ भूख लगना, जी मिचलाना, थकान
  • पेट में दर्द या दस्त (पतला पाखाना)
  • वज़न बढ़ना

दुर्लभ लेकिन गंभीर: तुरंत डॉक्टर से मिलें

  • ब्लड शुगर बहुत कम होना: उलझन, दौरे (फिट्स) या बेहोशी। तुरंत डॉक्टरी मदद लें
  • चेहरे, होंठ या गले में सूजन, या तेज़ दाने / चकत्ते (एलर्जी का असर)
  • त्वचा (चमड़ी) या आंखों का पीला पड़ना (जिगर (लिवर) की परेशानी)
  • आसानी से नील पड़ना, खून बहना या बुखार (खून की कोशिकाओं की गिनती में बदलाव)

किन्हें सावधानी रखनी चाहिए

कुछ लोगों को यह दवा लेने से पहले डॉक्टर से पूछना चाहिए, या लेते समय अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए। हर डॉक्टर, डेंटिस्ट और अस्पताल को बताएं कि आप यह दवा लेते हैं।

जब लेबल के अनुसार इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए

  • ग्लिक्लाज़ाइड या इसी तरह की दवाओं से एलर्जी
  • टाइप 1 डायबिटीज़ या डायबिटिक कीटोएसिडोसिस
  • गुर्दे (किडनी) या जिगर (लिवर) की गंभीर बीमारी
  • एक्यूट पॉरफाइरिया
  • खाना छोड़ना, शराब, ज़्यादा कसरत, बड़ी उम्र, गुर्दे या जिगर की परेशानी: ब्लड शुगर कम होने की संभावना बढ़ जाती है
  • गुर्दे या जिगर की गंभीर बीमारी, या एक्यूट पॉरफाइरिया: आमतौर पर यह दवा उपयुक्त नहीं होती
  • उल्टी, दस्त या बुखार के साथ बीमारी: अपनी डायबिटीज़ की दवाओं के बारे में सलाह के लिए डॉक्टर या फार्मासिस्ट से बात करें। बताए बिना खुद दवा बंद न करें
  • गर्भावस्था और स्तनपान: आमतौर पर इस्तेमाल नहीं की जाती; आपके डॉक्टर कोई और इलाज सुझा सकते हैं

ग्लिक्लाज़ाइड के साथ असर डालने वाली दवाएँ और चीज़ें

यह दवा दूसरी दवाओं के काम करने का तरीका बदल सकती है, और कुछ दवाएं इसके असर को बदल देती हैं। आप जो कुछ भी लेते हैं, जड़ी-बूटी वाले नुस्खों समेत, उसके बारे में अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट को बताएं।

  • डायबिटीज़ की दूसरी दवाएं और इंसुलिन: ब्लड शुगर कम होने की संभावना बढ़ जाती है
  • क्लैरिथ्रोमाइसिन जैसे एंटीबायोटिक और फ्लुकोनाज़ोल या माइकोनाज़ोल जैसी फफूंद-रोधी दवाएं: ये इसके असर को बढ़ा सकती हैं
  • बीटा-ब्लॉकर और ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) या दिल की कुछ अन्य दवाएं: ये ब्लड शुगर कम होने के लक्षणों को छिपा सकती हैं
  • स्टेरॉयड, थायज़ाइड पेशाब बढ़ाने वाली गोलियां और एस्ट्रोजन: ये ब्लड शुगर बढ़ा सकती हैं

लैब जाँच पर असर

  • ब्लड शुगर और HbA1c जांच: यह देखने के लिए कि डायबिटीज़ कितनी काबू में है

अगर किसी ने ज़्यादा ले ली हो

बताई गई मात्रा से बहुत ज़्यादा दवा लेना डॉक्टरी मामला है। अगर कोई ज़्यादा दवा खा ले, तो 112 पर कॉल करें या नज़दीकी अस्पताल जाएं और दवा का पत्ता साथ ले जाएं।

भारत में नियामक स्थिति

भारत में सिर्फ़ डॉक्टर की पर्ची पर बिक्री के लिए मंज़ूर (अनुमोदित)। सिर्फ़ ग्लिक्लाज़ाइड वाली दवा सीडीएससीओ की प्रतिबंधित दवाओं की सूची में नहीं है, लेकिन इसके साथ पियोग्लिटाज़ोन, मेटफॉर्मिन या अन्य घटकों वाली कई मिली-जुली (फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन) दवाएं धारा 26A के तहत प्रतिबंधित हैं, इसलिए पैक पर घटकों की सूची देखें।

दवा का प्रकार

ग्लिक्लाज़ाइड इस प्रकार की दवा है।

ग्लिक्लाज़ाइड वाली दवाएँ

भारत में बिकने वाली इन दवाओं में ग्लिक्लाज़ाइड होता है। इन्हें वर्णक्रम में दिया गया है, रैंकिंग के अनुसार नहीं।

ग्लिक्लाज़ाइड किसलिए इस्तेमाल होती है?

ग्लिक्लाज़ाइड वाली दवाएँ इन स्थितियों में इस्तेमाल होती हैं।

इसी प्रकार की दूसरी दवाएँ

ये सक्रिय घटक ग्लिक्लाज़ाइड के ही प्रकार के हैं।

आम सवाल

क्या ग्लिक्लाज़ाइड शुगर (डायबिटीज़) की दवा है?

हां। ग्लिक्लाज़ाइड टाइप 2 डायबिटीज़ वाले वयस्कों में खान-पान और गतिविधि के साथ ब्लड शुगर कम करने के लिए इस्तेमाल होती है। यह सिर्फ़ डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवा है, इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना इसे शुरू, बंद या बदलें नहीं।

ग्लिक्लाज़ाइड से ब्लड शुगर कम क्यों हो सकती है?

यह पैंक्रियास से तब भी इंसुलिन छुड़वाती है जब ब्लड शुगर ज़्यादा न हो। खाना छोड़ने, शराब, ज़्यादा कसरत या डायबिटीज़ की दूसरी दवाओं से ब्लड शुगर कम होने की संभावना बढ़ती है। चेतावनी के लक्षण पहचानें और डॉक्टर की योजना मानें।

स्रोत

  1. Gliclazide: a medicine for type 2 diabetes. NHS (UK)
  2. Type 2 diabetes: treatment. NHS (UK)
  3. List of drugs prohibited for manufacture and sale through gazette notifications under section 26A of the Drugs & Cosmetics Act 1940. Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO)
  4. National Formulary of India. Indian Pharmacopoeia Commission