ओफ़्लॉक्सासिन (Ofloxacin): उपयोग, कैसे काम करता है, दवाएँ
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ओफ़्लॉक्सासिन एक फ़्लोरोक्विनोलोन एंटीबायोटिक है जिसका इस्तेमाल कुछ ख़ास बैक्टीरियल संक्रमणों के इलाज के लिए होता है। इनमें पेशाब की नली, छाती, त्वचा के कुछ संक्रमण और कुछ यौन संचारित संक्रमण शामिल हैं। यह केवल बैक्टीरिया पर असर करती है, इसलिए सर्दी-ज़ुकाम, फ़्लू या दूसरे वायरल संक्रमणों में मदद नहीं करती। टेंडन, नसों और मानसिक स्वास्थ्य पर दुर्लभ लेकिन गंभीर साइड इफ़ेक्ट की वजह से नियामक इसे केवल तभी इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं जब आम तौर पर सुझाई जाने वाली दूसरी एंटीबायोटिक उपयुक्त न हों, और भारत में यह डॉक्टर के पर्चे पर मिलने वाली दवा है।
फ़ार्मासिस्ट समीक्षा जारी है। यह पेज नीचे दिए गए स्रोतों पर आधारित है और हमारे पंजीकृत फ़ार्मासिस्ट इसकी जाँच कर रहे हैं।

ओफ़्लॉक्सासिन कैसे काम करती है?
ओफ़्लॉक्सासिन बैक्टीरिया के दो एंज़ाइमों, DNA जाइरेज़ और टोपोआइसोमरेज़ IV, को रोकती है, जिनकी बैक्टीरिया को अपना DNA कॉपी करने के लिए ज़रूरत होती है, जिससे बैक्टीरिया मर जाते हैं। खुराक का लगभग पूरा हिस्सा शरीर में सोख लिया जाता है, और इसका ज़्यादातर हिस्सा बिना बदले पेशाब के रास्ते निकलता है; यह एक वजह है कि इसका इस्तेमाल पेशाब के संक्रमणों में होता है।
ओफ़्लॉक्सासिन कैसे लें
लेबल पर लिखा या अपने डॉक्टर का बताया तरीका मानें। ऑफ्लॉक्सासिन आम तौर पर दिन में दो बार, लगभग 12 घंटे के अंतर पर ली जाती है। खुराक और कितने दिन लेनी है, यह संक्रमण पर और गुर्दों (किडनी) के काम करने की क्षमता पर निर्भर करता है। डॉक्टर ने जितने दिन का कोर्स बताया है, उसे पूरा लें।
ओफ़्लॉक्सासिन के साइड इफेक्ट्स
ज़्यादातर लोग ऑफ्लॉक्सासिन बिना किसी गंभीर परेशानी के लेते हैं; जी मिचलाना, सिरदर्द, नींद न आना और चक्कर आना सबसे आम साइड इफेक्ट (दुष्प्रभाव) हैं। दुर्लभ मामलों में फ्लोरोक्विनोलोन एंटीबायोटिक के गंभीर साइड इफेक्ट हो सकते हैं, जो अक्षम कर सकते हैं और लंबे समय तक रह सकते हैं।
कम होने वाले या हल्के
- जी मिचलाना
- सिरदर्द
- नींद न आना
- चक्कर आना
- दस्त (पतला पाखाना) या उल्टी
- महिलाओं में गुप्तांग के आसपास खुजली या स्राव, जो थ्रश (फंगल संक्रमण) का संकेत हो सकता है
दुर्लभ लेकिन गंभीर: तुरंत डॉक्टर से मिलें
- किसी टेंडन (नस जैसी कड़ी पट्टी जो मांसपेशी को हड्डी से जोड़ती है) में दर्द या सूजन, खासकर टखने के पीछे की एकिलीज़ टेंडन में, या टेंडन का फट जाना। तुरंत अपने डॉक्टर को बताएं। यह दवा शुरू करने के 48 घंटे के भीतर या बंद करने के महीनों बाद भी हो सकता है
- हाथ, बांह, पैर या टांगों में सुन्नपन, झनझनाहट, जलन वाला दर्द या कमज़ोरी, जो नसों को नुकसान के संकेत हो सकते हैं और लंबे समय तक रह सकते हैं। पहले संकेत दिखते ही अपने डॉक्टर को बताएं
- मूड या सोचने में बदलाव: घबराहट, बेचैनी, उलझन, ध्यान लगाने में दिक्कत, याददाश्त की समस्या, बुरे सपने, ऐसी चीज़ें दिखना या सुनाई देना जो वहां नहीं हैं, उदासी (डिप्रेशन), या खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार। तुरंत डॉक्टरी मदद लें
- दौरे (झटके), कंपकंपी या तेज़ सिरदर्द
- ब्लड शुगर (खून में शक्कर) कम होने के संकेत, खासकर डायबिटीज़ वाले लोगों में: कंपकंपी, पसीना, भूख, तेज़ धड़कन, उलझन या नींद आना/सुस्ती। बहुत कम ब्लड शुगर से बेहोशी (कोमा) हो सकती है। ब्लड शुगर बढ़ भी सकती है
- छाती, पेट या पीठ में अचानक तेज़ दर्द, जो महाधमनी (शरीर की मुख्य नस) में उभार या फटने का संकेत हो सकता है। तुरंत 112 पर कॉल करें
- तेज़ या अनियमित धड़कन, या बेहोश हो जाना
- मायस्थीनिया ग्रेविस वाले लोगों में मांसपेशियों की कमज़ोरी या सांस लेने में तकलीफ का नया होना या बढ़ना
- गंभीर एलर्जी का असर (रिएक्शन) होने के संकेत, जो पहली खुराक के बाद भी हो सकते हैं: चेहरे, होंठ या गले में सूजन, सांस लेने में तकलीफ, पित्ती (शरीर पर उभरे चकत्ते) या गिर पड़ना
- त्वचा (चमड़ी) पर गंभीर असर, जैसे छाले पड़ना या त्वचा उतरना, या धूप में खुली त्वचा पर दाने या धूप से झुलसने जैसा असर
- त्वचा या आंखों का पीला पड़ना, गहरे रंग का पेशाब, या पेट के ऊपरी दाएं हिस्से में दर्द, जो जिगर (लिवर) की समस्या के संकेत हो सकते हैं
- तेज़ या पानी जैसे दस्त, या खून वाले दस्त, जो सी. डिफिसिल नामक आंत के संक्रमण का संकेत हो सकते हैं, कोर्स खत्म होने के हफ्तों बाद भी
- देखने, सुनने, स्वाद या सूंघने की क्षमता में बदलाव
किन्हें सावधानी रखनी चाहिए
ऑफ्लॉक्सासिन हर किसी के लिए ठीक नहीं है, और नियामक संस्थाएं सलाह देती हैं कि फ्लोरोक्विनोलोन तभी इस्तेमाल हों जब आम तौर पर बताई जाने वाली दूसरी एंटीबायोटिक उपयुक्त न हों। इसे लेने से पहले अपने डॉक्टर को अपनी सेहत और दूसरी दवाओं के बारे में बताएं।
जब लेबल के अनुसार इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए
- ऑफ्लॉक्सासिन, किसी दूसरी क्विनोलोन या फ्लोरोक्विनोलोन एंटीबायोटिक, या गोली के किसी भी घटक से एलर्जी
- मिर्गी, या दिमाग या नसों की ऐसी बीमारी जिसमें दौरे पड़ने की संभावना ज़्यादा होती है
- पहले फ्लोरोक्विनोलोन एंटीबायोटिक के इलाज के दौरान टेंडन (मांसपेशियों को हड्डी से जोड़ने वाली नस) को नुकसान होना
- बच्चे और किशोर, जिनका शारीरिक विकास अभी हो रहा है
- गर्भावस्था या स्तनपान (बच्चे को दूध पिलाना)
- G6PD की कमी (खून की लाल कोशिकाओं के एंजाइम की विरासत में मिलने वाली समस्या)
- यह सिर्फ़ बैक्टीरिया (जीवाणु) से होने वाले संक्रमण का इलाज करती है। सर्दी-जुकाम, फ्लू या दूसरे वायरस के संक्रमण में यह काम नहीं करती, और ज़रूरत न होने पर लेने से एंटीबायोटिक प्रतिरोध (रेज़िस्टेंस) बढ़ता है
- ऑफ्लॉक्सासिन या किसी दूसरी क्विनोलोन या फ्लोरोक्विनोलोन एंटीबायोटिक, जैसे सिप्रोफ्लॉक्सासिन, लेवोफ्लॉक्सासिन या नॉरफ्लॉक्सासिन से पहले एलर्जी या गंभीर साइड इफेक्ट हुआ हो: अपने डॉक्टर को बताएं, क्योंकि इसे नहीं लेना चाहिए
- 60 साल से ज़्यादा उम्र, गुर्दे की बीमारी, गुर्दे, दिल या फेफड़े का ट्रांसप्लांट, या प्रेडनिसोलोन जैसी स्टेरॉयड दवाएं लेना: टेंडन को नुकसान का खतरा ज़्यादा
- पहले टेंडन की समस्या होना, जैसे रूमेटॉयड आर्थराइटिस में, या बहुत ज़्यादा शारीरिक मेहनत
- मायस्थीनिया ग्रेविस: ऑफ्लॉक्सासिन मांसपेशियों की कमज़ोरी बढ़ा सकती है, इसलिए अपने डॉक्टर को बताएं
- मिर्गी, पहले दौरे पड़ना, या दिमाग या नसों की दूसरी बीमारियां
- मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं का इतिहास
- डायबिटीज़, खासकर अगर आप इंसुलिन या ब्लड शुगर घटाने वाली गोलियां लेते हैं: आपका डॉक्टर शुगर ज़्यादा बार जांचने को कह सकता है
- महाधमनी का एन्यूरिज़्म (मुख्य नस में उभार), या इसका ज़्यादा खतरा, जैसे बढ़ती उम्र, हाई ब्लड प्रेशर (रक्तचाप), धमनियों का सख्त होना, या मार्फान या एहलर्स-डैनलॉस सिंड्रोम जैसी बीमारियां
- दिल की धड़कन की लय की समस्या, पहले से पता लंबा QT इंटरवल, पोटैशियम कम होना, या दिल की धड़कन की लय की दवाएं लेना
- गुर्दे या जिगर की बीमारी
- गर्भावस्था: सुरक्षा साबित नहीं हुई है, इसलिए आम तौर पर इससे बचा जाता है; अगर आप गर्भवती हैं या गर्भावस्था की योजना बना रही हैं तो डॉक्टर को बताएं
- स्तनपान (बच्चे को दूध पिलाना): ऑफ्लॉक्सासिन मां के दूध में पहुंचती है; अपने डॉक्टर से पूछें
- 18 साल से कम उम्र के बच्चे और किशोर: बढ़ते जोड़ों पर संभावित असर के कारण आम तौर पर इस्तेमाल नहीं की जाती
- धूप: ऑफ्लॉक्सासिन से त्वचा धूप के प्रति ज़्यादा संवेदनशील हो सकती है
- चक्कर आना या नींद आना/सुस्ती: जब तक पता न चले कि दवा का आप पर क्या असर होता है, गाड़ी न चलाएं और मशीनें इस्तेमाल न करें
ओफ़्लॉक्सासिन के साथ असर डालने वाली दवाएँ और चीज़ें
कुछ दवाएं और सप्लीमेंट ऑफ्लॉक्सासिन के खून में सोखे जाने का तरीका बदल देते हैं या इसके साइड इफेक्ट बढ़ा देते हैं। आप जो कुछ भी लेते हैं, उसके बारे में अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट (दवा विक्रेता) को बताएं।
- एल्युमिनियम, मैग्नीशियम या कैल्शियम वाले एंटासिड, सुक्रालफेट, आयरन, ज़िंक या मिनरल वाले मल्टीविटामिन: ऑफ्लॉक्सासिन इनसे कम से कम 2 घंटे पहले या बाद में लें
- थियोफिलिन (दमे की दवा): इसकी मात्रा खून में बढ़ सकती है, जिससे दौरे जैसे साइड इफेक्ट बढ़ सकते हैं
- वारफरिन: इसका खून पतला करने वाला असर बढ़ सकता है, इसलिए आपका डॉक्टर खून जमने की जांच ज़्यादा बार कर सकता है
- इबुप्रोफेन जैसी NSAID दर्द निवारक दवाएं: दौरे का खतरा बढ़ा सकती हैं
- इंसुलिन और ग्लिबेनक्लामाइड जैसी डायबिटीज़ की गोलियां: ब्लड शुगर बहुत कम या बहुत ज़्यादा हो सकती है
- प्रेडनिसोलोन जैसी स्टेरॉयड दवाएं: टेंडन को नुकसान का खतरा ज़्यादा
- दिल की धड़कन की लय पर असर डालने वाली दवाएं, जैसे एमियोडेरोन, सोटालोल, क्विनिडीन और प्रोकेनामाइड, और कुछ एंटीडिप्रेसेंट और एंटीसाइकोटिक दवाएं: अनियमित धड़कन का खतरा ज़्यादा
- साइक्लोस्पोरिन और प्रोबेनेसिड: दूसरी दवाओं के साथ संभावित असर, जिनका अच्छी तरह अध्ययन नहीं हुआ है, इसलिए अपने डॉक्टर को बताएं
लैब जाँच पर असर
- पेशाब में अफीम जैसे नशीले पदार्थों (ओपिएट) की जांच: इम्यूनोएसे किट से गलत पॉज़िटिव रिज़ल्ट आ सकता है; ज़्यादा सटीक पुष्टि वाली जांच की ज़रूरत पड़ सकती है
- पेशाब में पोर्फिरिन की जांच: गलत पॉज़िटिव रिज़ल्ट आ सकता है, इसलिए पॉज़िटिव रिज़ल्ट की पुष्टि किसी दूसरे तरीके से करानी पड़ सकती है
अगर किसी ने ज़्यादा ले ली हो
ऑफ्लॉक्सासिन के ओवरडोज़ (ज़रूरत से ज़्यादा दवा) का कोई खास एंटीडोट (काट) नहीं है; अस्पताल में इलाज के दौरान व्यक्ति पर नज़र रखी जाती है और शरीर में पानी की कमी नहीं होने दी जाती। अगर किसी ने बताई गई मात्रा से ज़्यादा दवा ली है, खासकर अगर उसे उलझन, चक्कर या दौरे पड़ रहे हों, तो 112 पर कॉल करें या नज़दीकी अस्पताल जाएं और दवा का पैक साथ ले जाएं।
भारत में
भारत में इस दवा की अधिकतम कीमत, आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल होने और कानूनी स्थिति की जानकारी, सरकारी अधिसूचनाओं से ली गई है।
आवश्यक दवा (NLEM)
राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची (NLEM) 2022 में शामिल नहीं है, और S.O. 1575(E) के तहत NPPA द्वारा अधिकतम कीमत तय की गई दवाओं में भी नहीं है।
भारत में नियामक स्थिति
भारत में सिर्फ़ डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवा के रूप में बिक्री के लिए मंज़ूर। सिर्फ़ ऑफ्लॉक्सासिन वाली दवा सीडीएससीओ की प्रतिबंधित दवाओं की सूची में नहीं है। ऑफ्लॉक्सासिन को दूसरे घटकों के साथ मिलाने वाली कई फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन दवाएं प्रतिबंधित हैं, जैसे ऑफ्लॉक्सासिन के साथ नाइटाज़ोक्सानाइड, एज़िथ्रोमाइसिन के साथ ऑफ्लॉक्सासिन, और फ्लेवोक्सेट के साथ ऑफ्लॉक्सासिन, इसलिए पैक पर लिखे घटकों की सूची देखें।
दवा का प्रकार
ओफ़्लॉक्सासिन इस प्रकार की दवा है।
ओफ़्लॉक्सासिन वाली दवाएँ
भारत में बिकने वाली इन दवाओं में ओफ़्लॉक्सासिन होता है। इन्हें वर्णक्रम में दिया गया है, रैंकिंग के अनुसार नहीं।
- ओफ़्लॉक्स 200 (Oflox 200) · 200 mg फ़िल्म-कोटेड टैबलेट
ओफ़्लॉक्सासिन किसलिए इस्तेमाल होती है?
ओफ़्लॉक्सासिन वाली दवाएँ इन स्थितियों में इस्तेमाल होती हैं।
आम सवाल
ओफ़्लॉक्सासिन आम तौर पर कैसे ली जाती है?
ओफ़्लॉक्सासिन की गोलियाँ आम तौर पर दिन में दो बार, लगभग 12 घंटे के अंतर पर, खाने के साथ या बिना ली जाती हैं। इन्हें एंटासिड, आयरन, ज़िंक या मिनरल सप्लीमेंट से कम से कम 2 घंटे के अंतर पर लें, क्योंकि ये दवा को शरीर में सोखे जाने से रोक सकते हैं। खुराक और कितने दिन लेनी है, यह डॉक्टर तय करते हैं; लेबल या डॉक्टर की सलाह का पालन करें।
ओफ़्लॉक्सासिन के किन साइड इफ़ेक्ट पर तुरंत ध्यान देना चाहिए?
अगर टेंडन में दर्द या सूजन, सुन्नपन, झुनझुनी या जलन वाला दर्द, मूड या सोच में बदलाव, लो ब्लड शुगर के लक्षण, तेज़ या अनियमित धड़कन, या सीने, पेट या पीठ में अचानक तेज़ दर्द हो, तो दवा लेना बंद करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ये साइड इफ़ेक्ट दुर्लभ हैं, लेकिन गंभीर हो सकते हैं और लंबे समय तक रह सकते हैं।
स्रोत
- Ofloxacin tablets: prescribing information (Dr. Reddy's Laboratories, revised 3/2023). DailyMed, US National Library of Medicine
- Ofloxacin. StatPearls, National Center for Biotechnology Information (NCBI), US National Library of Medicine
- Quinolone- and fluoroquinolone-containing medicinal products (referral). European Medicines Agency
- Fluoroquinolone antibiotics: must now only be prescribed when other commonly recommended antibiotics are inappropriate (Drug Safety Update, 22 January 2024). Medicines and Healthcare products Regulatory Agency (MHRA), UK
- National Formulary of India. Indian Pharmacopoeia Commission
- Ofloxacin 200 mg Tablets: Summary of Product Characteristics. electronic medicines compendium (emc), UK
- National List of Essential Medicines 2022. Ministry of Health and Family Welfare, Government of India (copy hosted by CDSCO)
- S.O. 1575(E), 25 March 2026: revision of ceiling prices of 767 scheduled formulations under NLEM 2022 (annual WPI revision). National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA), Government of India
