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थायरोनॉर्म 50 (Thyronorm 50): उपयोग, यह कैसे काम करती है, साइड इफेक्ट्स

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थायरोनॉर्म 50 एक गोली (टैबलेट) है जिसमें 50 माइक्रोग्राम (mcg) लेवोथायरोक्सिन होता है, जो थायरॉइड हार्मोन थायरोक्सिन का इंसान का बनाया रूप है। यह कम काम करने वाले थायरॉइड (हाइपोथायरॉइडिज़्म) के इलाज के लिए इस्तेमाल होती है, क्योंकि यह उस हार्मोन की कमी पूरी करती है जो शरीर ज़रूरत भर नहीं बना पाता। यह सिर्फ़ डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवा है, जो आमतौर पर जीवन भर रोज़ ली जाती है और खुराक खून की जांच से तय होती है।

सक्रिय घटक
लेवोथायरॉक्सिन 50 mcg
दवा का प्रकार
थायरॉइड हार्मोन
किसमें इस्तेमाल होती है
थायरॉइड का कम सक्रिय होना (हाइपोथायरॉइडिज़्म)
असर शुरू होता है
लक्षणों में आराम कुछ हफ़्तों में आता है; पूरा असर होने में 4 से 6 हफ़्ते लग सकते हैं
असर रहता है
एक खुराक का असर लगभग एक दिन रहता है, इसलिए यह दिन में एक बार ली जाती है
खाने के साथ या बिना
खाली पेट, नाश्ते से 30 से 60 मिनट पहले
शराब
सीधा कोई असर नहीं, पर अपने डॉक्टर से पूछें
गर्भावस्था
बंद न करें; अपने डॉक्टर को बताएं, क्योंकि खुराक अक्सर बदलनी पड़ती है
आदत बनाने वाली
नहीं
निर्माता
Abbott India Ltd
थायरोनॉर्म 50: एक नज़र में. किसलिए इस्तेमाल होती है: कम काम करने वाला थायरॉइड (हाइपोथायरॉइडिज़्म). पहले डॉक्टर से पूछें: दिल की बीमारी या अनियमित धड़कन, अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रीनल ग्लैंड) की समस्याएं, डायबिटीज़, कमज़ोर हड्डियां, ज़्यादा काम करने वाला थायरॉइड, गर्भावस्था या गर्भावस्था की योजना, कैल्शियम, आयरन या एंटासिड की गोलियां. इनके लिए तुरंत चिकित्सा सहायता लें: सीने में दर्द, बहुत तेज़ या अनियमित धड़कन, चेहरे, होंठ या गले में सूजन, सांस लेने में तकलीफ, दौरे. ज़्यादा मात्रा में लेना: एक गोली ज़्यादा लेना आमतौर पर खतरनाक नहीं होता, पर फार्मासिस्ट (दवा विक्रेता) से पूछें। अगर कोई बहुत ज़्यादा ले ले या बीमार महसूस करे, तो 112 पर कॉल करें या नज़दीकी अस्पताल जाएं. खुराक: लेबल या अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार लें.

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इस पेज पर
  1. थायरोनॉर्म 50 किसलिए इस्तेमाल होती है?
  2. थायरोनॉर्म 50 कैसे काम करती है?
  3. थायरोनॉर्म 50 कैसे लें
  4. थायरोनॉर्म 50 के साइड इफेक्ट्स
  5. किन्हें सावधानी रखनी चाहिए
  6. थायरोनॉर्म 50 के साथ असर डालने वाली दवाएँ और चीज़ें
  7. अगर किसी ने ज़्यादा ले ली हो
  8. कैसे रखें
  9. भारत में नियामक स्थिति
  10. इसी दवा वाले दूसरे ब्रांड
  11. अन्य मात्रा और रूप
  12. आम सवाल

थायरोनॉर्म 50 किसलिए इस्तेमाल होती है?

थायरोनॉर्म 50 तब इस्तेमाल होती है जब थायरॉइड ग्रंथि ज़रूरत भर थायरॉइड हार्मोन नहीं बनाती।

  • कम काम करने वाला थायरॉइड (हाइपोथायरॉइडिज़्म), कमी वाले हार्मोन की जगह लेने के लिए
  • थायरॉइड की सर्जरी, रेडियोआयोडीन इलाज या ऑटोइम्यून थायरॉइड की स्थिति से हुआ हाइपोथायरॉइडिज़्म, जैसा आपका डॉक्टर तय करे

थायरोनॉर्म 50 कैसे काम करती है?

थायरॉइड ग्रंथि ऐसे हार्मोन बनाती है जो तय करते हैं कि शरीर ऊर्जा कितनी तेज़ी से इस्तेमाल करे। जब यह बहुत कम बनाती है, तो इंसान को थकान, ठंड लगना और उदासी महसूस हो सकती है और वज़न बढ़ सकता है। लेवोथायरोक्सिन मुख्य थायरॉइड हार्मोन थायरोक्सिन की ही प्रति है, इसलिए इसे रोज़ लेने से जो कमी है वह पूरी होती है और खून में हार्मोन का स्तर सामान्य सीमा में लौट आता है।

लेने के बाद आपके शरीर में क्या होता है

  1. आप गोली निगलते हैं

    लेवोथायरोक्सिन मुंह से दिन में एक बार, खाली पेट पानी के साथ ली जाती है, आमतौर पर नाश्ते से 30 से 60 मिनट पहले। खाना, चाय, कॉफ़ी और कुछ दूसरी दवाएं इसके सोखे जाने की मात्रा घटा सकती हैं।

  2. यह छोटी आंत में सोखी जाती है

    खुराक का ज़्यादातर हिस्सा छोटी आंत में सोखा जाता है और खून में पहुंच जाता है। कैल्शियम, आयरन, एंटासिड और कुछ खाने की चीज़ें इसे आंत में जकड़ सकती हैं, इसीलिए इन्हें कई घंटे के अंतर पर लिया जाता है।

  3. यह प्रोटीन से जुड़कर चलती है

    खून में लगभग सारा लेवोथायरोक्सिन ले जाने वाले प्रोटीन से जुड़ जाता है। बहुत थोड़ा सा खुला हिस्सा ही शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचता है।

  4. जहां ज़रूरत हो वहां यह बदली जाती है

    थायरोक्सिन (T4) हार्मोन का भंडार रूप है। जिगर (लिवर) और गुर्दे (किडनी) जैसे अंग ज़रूरत के हिसाब से इसे ज़्यादा सक्रिय हार्मोन T3 में बदल देते हैं।

  5. चयापचय (मेटाबॉलिज़्म) सामान्य हो जाता है

    हार्मोन का स्तर सामान्य सीमा में आने पर शरीर की ऊर्जा का इस्तेमाल, दिल की धड़कन और तापमान का नियंत्रण फिर सामान्य ढंग से काम करने लगते हैं। थकान, ठंड लगना और कब्ज़ जैसे लक्षण कुछ हफ़्तों में धीरे-धीरे कम होते हैं।

  6. खून की जांच से खुराक तय होती है

    डॉक्टर दवा शुरू करने या खुराक बदलने के लगभग 6 से 8 हफ़्ते बाद थायरॉइड स्टिम्युलेटिंग हार्मोन (TSH) की खून की जांच करते हैं, फिर कुछ अंतर पर दोहराते हैं। जांच लक्षित सीमा में आने तक खुराक में बदलाव किया जाता है।

  7. यह धीरे-धीरे शरीर से निकलती है

    लेवोथायरोक्सिन शरीर में कई दिन रहती है (इसकी हाफ-लाइफ लगभग एक हफ़्ता है), इसलिए यह दिन में एक बार ली जाती है और एक खुराक छूट जाना आमतौर पर समस्या नहीं होती। जिगर (लिवर) और गुर्दे (किडनी) इसे समय के साथ बाहर निकाल देते हैं।

थायरोनॉर्म 50 कैसे लें

थायरोनॉर्म 50 ठीक वैसे लें जैसा आपका डॉक्टर बताए या पैक पर लिखा हो। खुराक हर व्यक्ति के लिए अलग होती है और खून की जांच से तय की जाती है, इसलिए इसे कभी खुद न बदलें।

  • यह दिन में एक बार, रोज़ एक ही समय पर ली जाती है, आमतौर पर सुबह खाली पेट, नाश्ते, चाय या कॉफ़ी या दूसरी दवाओं से 30 से 60 मिनट पहले।
  • गोली को पूरा, एक गिलास पानी के साथ निगलें।
  • कैल्शियम, आयरन, एंटासिड और ऐसी ही दवाओं को इस गोली से कई घंटे दूर रखें। कितना अंतर रखना है, यह अपने फार्मासिस्ट (दवा विक्रेता) से पूछें।
  • अगर खुराक छूट जाए, तो याद आते ही ले लें, पर अगर अगली खुराक का समय लगभग हो गया हो तो न लें। दो खुराक एक साथ न लें।
  • ज़्यादातर लोगों को यह जीवन भर लेनी पड़ती है। अच्छा महसूस होने पर भी बंद न करें, क्योंकि लक्षण लौट सकते हैं।
  • आपका डॉक्टर जो थायरॉइड की खून की जांच कहे, वह करवाएं। खुराक ज़्यादा या कम होने पर लक्षण हो सकते हैं।
  • बच्चों में इसका इस्तेमाल डॉक्टर तय करते हैं, और खुराक भी वही तय करते हैं।

थायरोनॉर्म 50 के साइड इफेक्ट्स

सही खुराक होने पर लेवोथायरोक्सिन से आमतौर पर कम साइड इफेक्ट (दुष्प्रभाव) होते हैं। ज़्यादातर साइड इफेक्ट तब होते हैं जब खुराक ज़्यादा हो, इसीलिए खून की नियमित जांच ज़रूरी है।

कम होने वाले या हल्के

  • नींद आने में परेशानी
  • सिरदर्द
  • घबराहट या बेचैनी महसूस होना
  • पसीना आना या बहुत गर्मी लगना
  • बाल झड़ना
  • हाथों का कांपना या तेज़, धड़कता हुआ दिल
  • दस्त (पतला पाखाना) या बिना कोशिश वज़न घटना

दुर्लभ लेकिन गंभीर: तुरंत डॉक्टर से मिलें

  • गंभीर एलर्जी का असर (रिएक्शन) के संकेत: चेहरे, होंठ, जीभ या गले में सूजन, या सांस लेने में तकलीफ। तुरंत आपातकालीन डॉक्टरी मदद लें
  • सीने में दर्द, या बहुत तेज़ या अनियमित धड़कन, खासकर अगर आपको दिल की समस्या है
  • तेज़ बुखार के साथ दिल का बहुत तेज़ धड़कना और बेचैनी, जिसमें तुरंत डॉक्टरी मदद चाहिए
  • दौरे (मिर्गी जैसे झटके), जो कभी-कभार ही देखे गए हैं

किन्हें सावधानी रखनी चाहिए

लेवोथायरोक्सिन उस हार्मोन की जगह लेती है जो शरीर को चाहिए, इसलिए यह आमतौर पर जीवन भर ली जाती है और खुराक खून की जांच से तय होती है। ज़्यादा लेना भी उतनी ही समस्या है जितना कम लेना।

जब लेबल के अनुसार इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए

  • लेवोथायरॉक्सिन या गोली के किसी भी घटक से एलर्जी
  • एड्रीनल ग्रंथि की विफलता जिसका इलाज नहीं हुआ है
  • वज़न घटाने के लिए, या सामान्य थायरॉयड में इस्तेमाल
  • दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) या अनियमित धड़कन: ज़्यादा थायरॉइड हार्मोन दिल पर ज़ोर डाल सकता है, इसलिए डॉक्टर आमतौर पर कम खुराक से शुरू करके धीरे-धीरे बढ़ाते हैं
  • अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रीनल ग्लैंड) की समस्याएं (जैसे एडिसन रोग): इनका इलाज पहले होना चाहिए, क्योंकि लेवोथायरोक्सिन इन्हें बिगाड़ सकती है
  • डायबिटीज़: लेवोथायरोक्सिन ब्लड शुगर (खून में शक्कर) बदल सकती है, इसलिए आपकी डायबिटीज़ की दवा की खुराक की समीक्षा करनी पड़ सकती है
  • कमज़ोर हड्डियां (ऑस्टियोपोरोसिस) या मेनोपॉज़ के बाद की उम्र: बहुत ज़्यादा खुराक हड्डियों की मज़बूती घटा सकती है, इसलिए सबसे कम असरदार खुराक दी जाती है
  • ज़्यादा काम करने वाला थायरॉइड: लेवोथायरोक्सिन आमतौर पर उपयुक्त नहीं है
  • गर्भावस्था या गर्भावस्था की योजना: गर्भावस्था में खुराक अक्सर बढ़ानी पड़ती है, इसलिए अपने डॉक्टर को जल्दी बताएं और दवा अपने आप बंद न करें
  • वज़न घटाने के लिए नहीं: लेवोथायरोक्सिन का इस्तेमाल वज़न घटाने के लिए नहीं करना चाहिए, क्योंकि ज़्यादा खुराक से गंभीर, यहां तक कि जानलेवा नुकसान हो सकता है
  • बायोटिन (विटामिन B7) सप्लीमेंट, जिनमें बाल और नाखून के लिए वाले भी शामिल हैं: ये थायरॉइड की खून की जांच के नतीजे प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए डॉक्टर या लैब को बताएं
  • पहले लेवोथायरोक्सिन या गोली के किसी भी घटक से एलर्जी का असर (रिएक्शन) होना

थायरोनॉर्म 50 के साथ असर डालने वाली दवाएँ और चीज़ें

कई आम दवाएं और सप्लीमेंट शरीर को लेवोथायरोक्सिन सोखने से रोकते हैं, और कुछ यह बदल देते हैं कि कितनी खुराक चाहिए। आप जो कुछ भी लेते हैं, वह अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट (दवा विक्रेता) को बताएं।

  • कैल्शियम की गोलियां, आयरन की गोलियां, एंटासिड और सुक्रालफेट: ये लेवोथायरोक्सिन को ठीक से सोखे जाने से रोकती हैं, इसलिए इन्हें आमतौर पर कई घंटे के अंतर पर लिया जाता है। कितना अंतर रखना है, यह अपने फार्मासिस्ट से पूछें
  • पेट का एसिड कम करने वाली दवाएं, जैसे ओमेप्राज़ोल और दूसरी प्रोटॉन पंप इनहिबिटर (PPI) (एसिड कम करने वाली दवाएं): ये सोखी जाने वाली लेवोथायरोक्सिन की मात्रा घटा सकती हैं, इसलिए आपका डॉक्टर आपकी थायरॉइड की खून की जांच करवा सकता है
  • बाइल एसिड सीक्वेस्ट्रेंट कहलाने वाली कोलेस्ट्रॉल की दवाएं (जैसे कोलेस्टायरामिन): ये लेवोथायरोक्सिन को आंत में जकड़ लेती हैं
  • सोया उत्पाद, ज़्यादा रेशे वाला खाना, अखरोट और ग्रेपफ्रूट का जूस: गोली के पास लेने पर ये सोखे जाने को घटा सकते हैं
  • फेनोबार्बिटल, रिफैम्पिसिन और सर्ट्रालिन: इनसे लेवोथायरोक्सिन की ज़रूरी खुराक बढ़ सकती है
  • वारफरिन और ऐसी ही खून पतला करने वाली दवाएं: लेवोथायरोक्सिन इनका असर बढ़ा सकती है, इसलिए खून जमने की जांच की ज़रूरत पड़ सकती है
  • डिगॉक्सिन, एमियोडेरोन, कुछ अवसाद-रोधी (एंटीडिप्रेसेंट) और डायबिटीज़ की दवाएं: थायरॉइड का इलाज शुरू या बदलने पर इनका असर या ज़रूरी खुराक बदल सकती है
  • बायोटिन सप्लीमेंट: ये थायरॉइड की खून की जांच में भ्रामक नतीजे दे सकते हैं

लैब जाँच पर असर

  • थायरॉयड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (TSH) की खून की जांच: खुराक देखने और बदलने के लिए की जाती है
  • बायोटिन (विटामिन B7) सप्लीमेंट थायरॉयड जांच के भ्रामक नतीजे दे सकते हैं; डॉक्टर या लैब को बताएं

अगर किसी ने ज़्यादा ले ली हो

गलती से एक गोली ज़्यादा ले लेना आमतौर पर खतरनाक नहीं होता, पर सलाह के लिए फार्मासिस्ट (दवा विक्रेता) या डॉक्टर से बात करें। अगर किसी ने बताई गई मात्रा से बहुत ज़्यादा ले ली हो, या सीने में दर्द, तेज़ या अनियमित धड़कन, उलझन, दौरे हों या वह बहुत बीमार महसूस करे, तो 112 पर कॉल करें या नज़दीकी अस्पताल जाएं और दवा का पैक साथ ले जाएं।

कैसे रखें

ठंडी, सूखी जगह पर, असली पत्ते (स्ट्रिप) में, सीधी रोशनी और नमी से दूर और बच्चों की पहुंच से बाहर रखें। पैक पर रखने के तरीके की लाइन देखें। एक्सपायरी डेट (समाप्ति तिथि) के बाद इस्तेमाल न करें।

भारत में नियामक स्थिति

भारत में बिक्री के लिए मंज़ूर (अनुमोदित)। लेवोथायरोक्सिन सीडीएससीओ की प्रतिबंधित दवाओं की सूची में नहीं है (इस बैच के लिए धारा 26A की सूची देखी गई और उसमें लेवोथायरोक्सिन नहीं मिली)। थायरोनॉर्म 50 में सिर्फ़ लेवोथायरोक्सिन है।

इसी दवा वाले दूसरे ब्रांड

दूसरे ब्रांड और जेनेरिक गोलियों में भी लेवोथायरोक्सिन सोडियम होता है और वे उसी तरह काम करती हैं, पर वे अलग-अलग strength में आती हैं (जैसे 25, 50, 75, 100 और 125 mcg)। पैक पर strength देखें। अपने डॉक्टर से पूछे बिना ब्रांड या strength न बदलें।

अन्य मात्रा और रूप

थायरोनॉर्म कई strength में मिलती है, और strength पैक पर छपी होती है। लेवोथायरोक्सिन दूसरी कंपनियां भी दूसरे ब्रांड नामों से बेचती हैं। हर बार खरीदते समय strength देखें।

आम सवाल

थायरोनॉर्म 50 किसलिए इस्तेमाल होती है?

थायरोनॉर्म 50 में 50 mcg लेवोथायरोक्सिन होता है और यह कमी वाले थायरॉइड हार्मोन की जगह लेकर कम काम करने वाले थायरॉइड (हाइपोथायरॉइडिज़्म) के इलाज के लिए इस्तेमाल होती है। यह सिर्फ़ डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवा है और खुराक आपका डॉक्टर खून की जांच से तय करता है। इसे अपने आप शुरू, बंद या न बदलें।

थायरोनॉर्म 50 कब लेनी चाहिए?

इसे दिन में एक बार, एक ही समय पर लें, आमतौर पर सुबह खाली पेट, नाश्ते, चाय, कॉफ़ी या दूसरी दवाओं से 30 से 60 मिनट पहले। पानी के साथ निगलें। अपने डॉक्टर की सलाह या लेबल का तरीका मानें।

क्या मैं थायरोनॉर्म 50 के साथ कैल्शियम या आयरन की गोलियां ले सकता/सकती हूं?

कैल्शियम, आयरन और एंटासिड लेवोथायरोक्सिन को सोखे जाने से रोकते हैं, इसलिए इन्हें कई घंटे के अंतर पर लेना चाहिए। कितना अंतर रखना है, यह फार्मासिस्ट या डॉक्टर से पूछें, और समय अपने आप न बदलें।

मुझे थायरोनॉर्म 50 कितने समय तक लेनी होगी?

कम काम करने वाले थायरॉइड वाले ज़्यादातर लोग लेवोथायरोक्सिन जीवन भर लेते हैं। इसे बंद करने से लक्षण लौट सकते हैं। आपका डॉक्टर थायरॉइड की खून की जांच नियमित रूप से करेगा और ज़रूरत हो तो खुराक बदलेगा। अच्छा महसूस होने पर बंद न करें।

क्या थायरोनॉर्म 50 वज़न घटाने के लिए ली जा सकती है?

नहीं। लेवोथायरोक्सिन वज़न घटाने के लिए नहीं लेनी चाहिए। अगर आपका थायरॉइड सामान्य है, तो ज़्यादा खुराक से फ़ायदा नहीं होता और गंभीर, यहां तक कि जानलेवा नुकसान हो सकता है। यह सिर्फ़ उन लोगों के लिए है जिनके डॉक्टर ने कम काम करने वाला थायरॉइड बताया हो।

खुराक ज़्यादा होने के संकेत क्या हैं?

ज़्यादा खुराक से दिल का तेज़ या धड़कता हुआ महसूस होना, कांपना, पसीना, नींद न आना, घबराहट, दस्त (पतला पाखाना) और वज़न घटना हो सकता है। खुराक खुद कम न करें। अपने डॉक्टर से मिलें, जो आपकी खून की जांच देखकर खुराक बदल सकते हैं।

क्या मैं गर्भावस्था में थायरोनॉर्म 50 ले सकती हूं?

इसे बंद न करें। बिना इलाज का हाइपोथायरॉइडिज़्म मां और बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है, और गर्भावस्था में खुराक अक्सर बढ़ानी पड़ती है। गर्भावस्था की योजना बनाते ही या पता चलते ही अपने डॉक्टर को बताएं, ताकि आपकी थायरॉइड की जांच हो सके।

क्या मैं लेवोथायरोक्सिन का दूसरा ब्रांड ले सकता/सकती हूं?

पहले अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट (दवा विक्रेता) से पूछें। ब्रांड की strength अलग हो सकती है और खुराक हर व्यक्ति के लिए अलग होती है। ब्रांड या strength बदलने पर डॉक्टर कुछ हफ़्ते बाद थायरॉइड की खून की जांच दोबारा करवाना चाह सकते हैं।

स्रोत

  1. Levothyroxine: a medicine for an underactive thyroid (hypothyroidism). NHS (UK)
  2. Underactive thyroid (hypothyroidism): treatment. NHS (UK)
  3. Underactive thyroid (hypothyroidism). NHS (UK)
  4. SYNTHROID (levothyroxine sodium) tablets: prescribing information (label revised 2/2017, repackager copy). DailyMed, US National Library of Medicine
  5. Levothyroxine. StatPearls, NCBI, US National Library of Medicine
  6. Hypothyroidism. StatPearls, NCBI, US National Library of Medicine
  7. National Formulary of India. Indian Pharmacopoeia Commission
  8. List of drugs prohibited for manufacture and sale through gazette notifications under section 26A of the Drugs & Cosmetics Act 1940. Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO)
  9. National List of Essential Medicines 2022. Ministry of Health and Family Welfare, Government of India (copy hosted by CDSCO)